
🔸 कोर्ट का क्या कहना है?
न्यायमूर्ति संजय धर ने अपने फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति को अगर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी पर आपत्ति है, तो उसे ठोस और कानूनी सबूत पेश करने होंगे। सिर्फ हलफनामा देना काफी नहीं है।
🔸कोर्ट का क्या कहना है?
न्यायमूर्ति संजय धर ने अपने फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति को अगर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी पर आपत्ति है, तो उसे ठोस और कानूनी सबूत पेश करने होंगे। सिर्फ हलफनामा देना काफी नहीं है।
🔸 कौन सा कानून लागू हुआ?
यह फैसला J&K Land Revenue Act की धारा 31 पर आधारित है, जिसके अनुसार रिकॉर्ड में दर्ज प्रविष्टियां तब तक सही मानी जाती हैं जब तक उन्हें गलत साबित करने के लिए विश्वसनीय सबूत न हों।
🔸 अदालत ने कौन सा आदेश रद्द किया?
श्रीनगर के द्वितीय अतिरिक्त जिला न्यायाधीश द्वारा एक अंतरिम आदेश दिया गया था, जिसमें एक पक्ष के हलफनामे के आधार पर रिकॉर्ड पर सवाल उठाया गया था। हाईकोर्ट ने उस आदेश को ग़लत और कानून से परे बताया।
इस फैसले का असर क्या होगा?
- अब ज़मीन विवादों में बिना सबूत सिर्फ हलफनामे से कोर्ट को गुमराह नहीं किया जा सकेगा।
- राजस्व रिकॉर्ड की वैधानिक अहमियत और बढ़ गई है।
- जो लोग फर्जी दावे करने की कोशिश करते हैं, उनके लिए ये फैसला कड़ी चेतावनी है।
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निष्कर्ष (Conclusion):
इस फैसले ने एक बार फिर साफ कर दिया कि कानून दस्तावेज़ों और सबूतों पर चलता है, ना कि सिर्फ बयानों पर। ज़मीन-जायदाद से जुड़े विवादों में अब कोर्ट पहले से ज्यादा सावधानी और सख्ती बरतेगा।

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